बजट में सैलरीड क्लास पर दोहरी मार! कैसे? जानिए विस्तार से…

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नई दिल्ली। देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कल देश का आम बजट पेश किया। इस बजट से सैलरीड पर्सन को भारी निराशा हुई। बताया जा रहा है कि बजट में सैलरीड क्लस पर दोहरी मार पड़ी है। वित्त मंत्री ने 2.50 लाख रुपये सालाना से ज्यादा के प्रॉविडेंट फंड योगदान पर टैक्स लगाने का ऐलान किया है। अधिकतर सैलरीड क्लास के लिए रिटायरमेंट के बाद की बचत के लिए पीएफ सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। नए वेज कोड से न केवल टेक-होम सैलरी कम हो जाएगी बल्कि रिटायरमेंट सेविंग्स पर भी असर पड़ेगा। अभी तक टैक्स फ्री रिटर्न के लिए प्रॉविडेंट फंड में निवेश पर कोई कैप नहीं था। पिछले साल ही बजट में प्रॉविडेंट फंड स्कीम्स में अधिकतम 7.5 लाख रुपये निवेश करने की ऊपरी लिमिट तय की गई है। अब कर्मचारी भविष्य निधि में सालाना 2.5 लाख रुपये के निवेश के बाद विड्रॉल के समय टैक्स देना होता है। इसके साथ ही, वेज कोड 2019 में मेहनताना की नई परिभाषा से मालूम होता है कि पीएफ में कर्मचारियों का योगदान बढ़ाया जाएगा। इससे उनकी टेक-होम सैलरी घट जाएगी। इसके मुताबिक, सरकार ने कुल कंपेनसेशन की रकम पर 50 फीसदी पर कैप लगाया है। इससे नियोक्ताओं पर खर्च का बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की टेक होम सैलरी भी कम हो जाएगी। नए नियम के पालन के लिए नियोक्ताओं को बेसिक पे के अनुपात को बढ़ाना पड़ेगा और परिणामस्वरूप नियोक्ता और कर्मचारी का योगदान बढ़ जाएगा।
उदाहरण के तौर पर समझें तो मान लीजिए कि अमित नाम के एक व्यक्ति का बेसिक मंथली इनकम 1 लाख रुपये और उनका पीएफ योगदान 20,000 रुपये है। मान लीजिए कि नए वेज कोड के लागू होने से उनका पीएफ योगदान बढ़कर 25,000 रुपये हो जाता है तो उनकी टेक होम सैलरी 5,000 रुपये प्रति महीने तक कम हो जाएगी। चूंकि, 25,000 रुपये के हिसाब से पीएफ में उनका सालाना योगदान 2.5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाएगा, ऐसे में बजट ऐलान के बाद उन्हें अमित को इस पर टैक्स देना होगा। इस प्रकार उनकी बचत पर भी इसका असर पड़ेगा। बता दें कि नए वेज को पिछले साल अगस्त महीने में पास किया गया था जोकि 1 अप्रैल 2021 से लागू भी हो जाएगा।

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